पता नहीं क्यों? मुझे तुम्हारी पहले से कहीं अधिक याद आती है, जबकि मैं जानता हूँ कि तुम मेरा दिल तोड़ चुके हो।
कोई क्यों याद करेगा मुझे ए खुदा, बिना मतलब तो कोई तुझे भी याद नहीं करता।
अगर एक आदमी यह याद रख सकता है कि पिछले हफ्ते उसे किस बात की चिंता थी, तो वह बहुत अच्छी याददाश्त रखता है।
अपने आपको कभी भी परिस्थतियों का गुलाम मत समझों, क्योंकि आपको ये याद रखना है कि आप खुद अपने भाग्य विधाता हो।
यादों को लोग इतना क्यों पकड़ कर रखते है, क्योंकि सब कुछ बदल जाता है, लेकिन याद नहीं बदलती।
यादें अतीत की नहीं बल्कि भविष्य की कुंजी होती हैं।