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आप जिस तरह लोगों को देखते हो उसी तरह उनसे व्यव्हार करते हैं।

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हमारे समाज में साहस का विपरीत कायरता नहीं है, अनुरूप है।

आत्मसम्मान किसी भी लोकतंत्र का आधार है।

दुनिया में ज्यादातर परेशानी का कारण यह है कि लोग सबसे महत्वपूर्ण होना चाहते हैं।

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लोग आपके बारे में क्या सोचते हैं इससे आपको कोई मतलब नहीं है।

समाज अक्सर अपराधियों को माफ़ कर देता है पर सपने देखने वालों को कभी माफ़ नहीं करता।

पुरुष शराब की तरह होते हैं - कुछ सिरके में बदल जाते हैं, लेकिन सबसे अच्छे उम्र के साथ सुधर जाते हैं।

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जिन लोगों का आत्म-सम्मान कम है, उन्होंने इसे अर्जित किया है।

हमारे दोस्त हमे दिखाते है कि हम क्या कर सकते हैं, हमारे दुश्मन हमें सिखाते हैं कि हमें क्या करना चाहिए।

कोई व्यक्ति इतना अच्छा नहीं कि वो दूसरे की सहमति के बिना उसे नियंत्रित कर सके।