राजनीति में हमेशा वायदा निभाने वाले होनहार युवाओं को ही जाना चाहिए, क्योंकि वे ही हैं जो जीवन भर अपने वायदे को निभा सकते है।
अपने देश का यह दुर्भाग्य है कि आज़ादी के बाद देश और समाज के लिए नि:स्वार्थ भाव से खपने वाले सृजेताओं की कमी रही है।
यदि राजसत्ता अत्याचारी हो तो किसान का सीधा उत्तर यह होता है- जा, जा, तेरे ऐसे कितने राज मैंने मिट्टी में मिलते देखे है।
दूसरों की सुन लो, लेकिन अपना फैसला गुप्त रखो।
जब मैं एक लड़का था, तो मुझे बताया गया था कि कोई भी राष्ट्रपति बन सकता है, और अब मैं इस पर यकीन करता हूँ।
अगर लोकतंत्र आम लोगों की भलाई करने में सक्षम नहीं हैं तो लोकतंत्र का कोई मतलब नहीं रह जाता।
हमें वास्तविक स्थिति को समझने के बाद सरकार पर निर्भर नहीं रहना चाहिए।
किसी सिद्धांत को ना मानने वाले अवसरवादी हमारे देश की राजनीति नियंत्रित करते है।
यह भारत के नागरिकों के प्रति प्रधानमंत्री की जिम्मेदारी हैं कि इस आजाद देश में उनकी आजादी की रक्षा करे।
मेरी समझ से प्रशासन का मूल विचार यह है कि समाज को एकजुट रखा जाये ताकि वह विकास कर सके और अपने लक्ष्यों की तरफ बढ़ सके।