​हर मित्रता के पीछे कुछ स्वार्थ ज़रूर छिपा होता है​,​ दुनिया में ऐसी कोई दोस्ती नहीं जिसके पीछे लोगों के अपने हित न छिपे हों, यह ​कड़वा है सत्य है।​

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​एक छंटाक ख़ून​,​ किलो भर दोस्ती से ज़्यादा क़ीमती होता है।​

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धीरे ​ ​​बोलो, जल्दी सोचों और छोटे-से विवाद पर पुरानी दोस्ती कुर्बान मत करो।

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​एक छोटे से विवाद से एक महान रिश्ते को घायल मत होने देना।

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​या तो मैं अपना सबसे अच्छा दोस्त हूँ और या दुश्मन​​।

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​दो साल तक औरों को खुद में रुचि लेने का प्रयास करने की ​बजाय आप दो महीने दूसरों में रुचि लेकर कहीं अधिक मित्र बना सकते है​।

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जो लोग आपके लिए मायने रखते है, वह आपको पहचान ही लेंगे।

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दूसरों के प्रति हमारा रवैया ही हमारे प्रति उनके रवैये को निर्धारित करता है।

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​जो सबका मित्र होता है वो किसी का मित्र नहीं होता है।

सेवक को तब परखें जब वह काम ना कर रहा हो, रिश्तेदार को किसी कठिनाई में, मित्र को संकट में और पत्नी को घोर विपत्ति में।