कार्य उद्यम से सिद्ध होते है, मनोरथो से नही।
जो अपने योग्य कर्म में जी जान से लगा रहता है, वही संसार में प्रशंसा का पात्र होता है।
जागरण का अर्थ है कर्म में अवतीर्ण करना।
आप जो करने से डरते हैं उसे करिए और करते रहिये...अपने डर पर विजय पाने का यही सबसे पक्का और तेज तरीका है, जो आज तक खोजा गया है।
कहने की प्रकृति छोडो, करने का अभ्यास करो।
योग्यता से बिताए हुए जीवन को, हमें वर्षों से नहीं बल्कि कर्मों के पैमाने से तौलना चाहिए।
जो काम आ पड़े, साधना समझ कर पूरा करो|
बड़े कार्यों को भी छोटे कार्यों से ही आरम्भ करना चाहिए।
समय सीमा पर काम ख़तम कर लेना काफी नहीं है, मैं समय सीमा से पहले काम ख़त्म होने की अपेक्षा करता हूँ।
वही करो जिसे तुम सबसे ज्यादा बेहतर तरीके से कर सकते हो।