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​किसी कार्य को खूबसूरती से करने के लिए मनुष्य को उसे स्वयं करना चाहिए।

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​स्वतंत्र वही है, जो अपना काम स्वयं कर लेता है।

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​​यदि मुस्कान आपके स्वभाव में नहीं तो दुकानदारी के चक्कर में न पड़े।

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​अपने काम में सुन्दरता तलाशो​,​​ उससे सुंदर और कुछ हों ही नहीं सकता​। ​

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​हमारे लिए चींटी से बढ़कर और कोई उपदेशक नहीं है। वह काम करती है और खामोश रहती है।

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​किसी काम को करने के बारे में जरूरत से ज्यादा सोचना अक्सर उसके बिगड़ जाने का कारण बनता है​।

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​कर्म के बिना दूरदर्शिता एक दिवास्वप्न है, दूरदर्शिता के बिना कर्म दुःस्वप्न है।

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कर्म उसे नहीं बांधता जिसने काम का त्याग कर दिया है।

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दिलचस्प विचारों और नयी प्रौद्योगिकी को कम्पनी में परिवर्तित करना जो सालों तक नयी खोज करती रहे, ये सब करने के लिए बहुत अनुशाशन की आवश्यकता होती है।

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​कर्म करने मे ही अधिकार है, फल मे नही।

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