वृक्ष, सरोवर, सज्जन और मेघ-ये चारों परमार्थ हेतु देह धारण करते हैं।

मृत्यु और टैक्स और संतान! इन में से किसी के लिए भी कभी उचित वक़्त नहीं होता।

स्वास्थ्य और बुद्धिमत्ता जीवन के दो आशीर्वाद हैं।

आप इसे मोड़ और मरोड़ सकते हैं... आप इसका बुरा और गलत प्रयोग कर सकते हैं... लेकिन ईश्वर भी सत्य को बदल नहीं सकते हैं।

कभी कभी बहुत छोटे छोटे निर्णय ही हमारे जीवन को हमेशा के लिए बदल देते हैं।

आपको स्वस्थ शरीर में स्वस्थ मन-मस्तिष्क की प्रार्थना करनी चाहिए।

मुझे नहीं मालूम कि आप कुछ बदल सकते हैं, और बदल भी दें तो यह सागर में एक बूंद बराबर ही है।

एक ही चीज़ है जो बहुमत को नहीं मानती और वह है मनुष्य की अंतरात्मा।

प्रकृति का अध्ययन करें, प्रकृति से प्रेम करें, प्रकृति के सान्निध्य में रहें। यह आप को कभी हताश नहीं करेगी।

बच्चों को शिक्षित करना तो ज़रूरी है ही, उन्हें अपने आप को शिक्षित करने के लिए छोड़ देना भी उतना ही ज़रूरी है।

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