sms

माँगते थे रोज़ दुआ में सुकून ख़ुदा से;
सोचते थे वो चैन हम लाएं कहाँ से;
किसी रोज एक प्यासे को पानी क्या पिला दिया;
लगा जैसे खुदा ने सुकून का पता बता दिया।

उजाले अपनी यादों के हमारे साथ रहने दो;
ना जाने किस गली में ज़िंदगी की शाम हो जाए।

पानी फेर दो इन पन्नों पर ताकि धुल जाए स्याही सारी;
ज़िन्दगी फिर से लिखने का मन होता है कभी-कभी।

​ये सोच कर की शायद वो खिड़की से झाँक ले​;​
उसकी गली के बच्चे आपस में लड़ा दिए मैंने​।

आपको अपने ज़ख्म दिखाना चाहता हूँ मैं;
मगर क्या करूँ बहुत ही दूर हैं आप;
आपको चाहता हूँ बनाना साथी अपना;
मगर मानता हूँ, रस्मों के हाथों मजबूर हैं आप।

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काश कि वो लौट के आयें मुझसे ये कहने;
कि तुम कौन होते हो मुझसे बिछड़ने वाले।

ग़ालिब ने यह कह कर, तोड़ दी माला;
गिन कर क्यों नाम लूँ उसका, जो बेहिसाब देता है।

ना जी भर के देखा, ना कुछ बात की;
बड़ी आरज़ू थी हम को मुलाक़ात की।

फ़ुर्सतें मिलें जब भी रंजिशें भुला देना;
कौन जाने सांसोंं की मोहलतें कहाँ तक है।

खुदा को भी है आरज़ू तेरी;
हमारी तो भला औकात क्या है।