लोग कहते हैं किसी एक के चले जाने से ज़िंदगी अधूरी नहीं होती;
लेकिन लाखों के मिल जाने से उस एक की कमी पूरी नहीं होती है।
पलट कर भी ना देखो और ना तुम आवाज़ दो मुझ को;
बड़ी मुश्किल से सीखा है किसी को अलविदा कहना।
हमारी किस्मत हमें दगा दे गई;
ज़िंदगी भर अकेले रहने की सज़ा दे गई;
जिन्हें हमने जान से भी ज्यादा प्यार किया;
वही हमें हर पल मरने की सज़ा दे गई।
कुछ उलझे सवालों से डरता है दिल;
ना जाने क्यों तन्हाई में भखड़ता है दिल;
किसी को पाना कोई बड़ी बात नहीं है;
पर किसी को खोने से डरता है ये दिल।
बहुत दूर है मेरे शहर से तेरे शहर का किनारा;
फिर भी हम हवा के हर झोंके से तेरा हाल पूछते है।
शायद वो अपना वजूद छोड़ गया है मेरी हस्ती में;
यूँ सोते-सोते जाग जाना मेरी आदत पहले कभी ना थी।
फ़राज़' अब कोई सौदा कोई जुनूं भी नहीं;
मगर क़रार से दिन कट रहे हों, यूं भी नहीं।
कितना आसां था तेरे हिज्र में मरना जाना;
फिर भी इक उम्र लगी जान से जाते-जाते।
हिज्र: जुदाई
महल तेरी उम्मीद का ढहने नहीं दिया;
ग़म ज़ुदा हूँ मैं, किसी को कहने नहीं दिया;
ना हो यकीं तो पूछ लो इन आँखों से;
एक आंसू भी आँखों से बहने नहीं दिया।
तमन्ना से नहीं तन्हाई से डरते हैं;
प्यार से नहीं रुसवाई से डरते हैं;
मिलने की चाहत तो बहुत है पर;
मिलने के बाद की जुदाई से डरते हैं