हर घड़ी सोचते हैं भलाई तेरी;
सुन नहीं सकते बुराई तेरी;
हस्ते हस्ते रो पड़ती हैं आँखें मेरी;
इस तरह से सहते हैं जुदाई तेरी।
तुम लौट के आने का तकल्लुफ मत करना;
हम एक मोहब्बत को दो बार नहीं करते।
आज मैंने उनको खफा कर दिया;
ऐसा लगा जैसे ख़ुदा से दगा कर दिया;
कैसे मनाऊ उन्हें सोचता रहा दिन भर;
आंसुओं ने भी साथ निभाने से मना कर दिया।
न हाथ थाम सके न पकड़ सके दामन;
बहुत ही क़रीब से गुज़र कर बिछड़ गया कोई।
हर एक चेहरे पे गुमान उसका था;
बसा ना कोई दिल में ये खाली मकान उसका था;
तमाम दुःख मेरे दिल से मिट गए, लेकिन;
जो न मिट सका वो एक नाम उसका था।
मेरी गली से वो जब भी गुज़रता होगा;
मोड़ पे जा के कुछ देर ठहरता होगा;
भूल जाना मुझको इतना आसान तो न होगा;
दिल में कुछ तो टूट के उसके भी बिखरता होगा।
किसी से जुदा होना अगर इतना आसान होता ऐ दोस्त;
जिस्म से रूह को लेने कभी फ़रिश्ते नहीं आते।
किसी को ये सोचकर साथ मत छोड़ना की उसके पास कुछ नहीं तुम्हे देने के लिए;
बस ये सोचकर साथ निभाने की उसके पास कुछ नहीं है तुम्हारे सिवा खोने के लिए!
जिस अफ़साने को अंजाम तक लाना ना हो मुमकिन;
उसे एक खूबसूरत मोड़ देकर छोड़ना ही अच्छा।
अपनी नींद से मुझे कुछ यूँ भी मोहब्बत है"फ़राज़"
कि उसने कहा था मुझे पाना एक ख्वाब है तेरे लिए