जान मेरी तू क़त्ल कर दे मुझे;
पर छोड़ जाने का जुल्म ना करना।
हौंसला तो तुझमे भी ना था मुझसे जुदा होने का;
वर्ना काजल तेरी आँखों का यूँ फैला नहीं होता!
मोहब्बत-मोहब्बत की बस इतनी कहानी है;
इक टूटी हुई कश्ती और ठहरा हुआ पानी है;
इक फूल जो किताबों में कहीं दम तोड़ चुका है;
कुछ याद नहीं आता किसकी निशानी है!
अकेला सा महसूस करो जब तन्हाई में;
याद मेरी आये जब जुदाई में;
महसूस करना तुम्हारे करीब हूँ मैं;
जब चाहे देख लेना अपनी ही परछाई में!
वो रोए तो बहुत पर मुझसे मुंह मोड़कर रोए;
कोई मजबूरी होगी तो दिल तोड़कर रोए;
मेरे सामने कर दिए मेरे तस्वीर के टुकड़े;
पता चला मेरे पीछे वो उन्हें जोड़कर रोए!
दुआ करना यारों जुदा हो रहे हैं;
रही जिंदगी तो फिर आकर मिलेंगे;
अगर मर गया तो दुआ करते रहना;
आंसू बहाने की कोशिश ना करना!
सदियों से जागी आँखों को एक बार सुलाने आ जाओ;
माना कि तुमको प्यार नहीं, नफ़रत ही जताने आ जाओ;
जिस मोड़ पे हमको छोड़ गए हम बैठे अब तक सोच रहे;
क्या भूल हुई क्यों जुदा हुए, बस यह समझाने आ जाओ।