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फिल्मों की परिभाषा नहीं बदली : घई

फिल्मों की परिभाषा नहीं बदली : घई
मशहूर फिल्म निर्देशक सुभाष घई का मानना है कि 1970 के दशक के बाद से हिंदी फिल्म जगत में 'व्यावसायिक फिल्म' की परिभाषा नहीं बदली है।

सुभाष घई को 'कर्ज', 'राम लखन', 'खलनायक' और 'परदेस' जैसी फिल्मों के लिए जाना जाता है। घई ने गुजरे जमाने को याद करते हुए बीते रविवार को ट्विटर पर लिखा, "अगर भारत में पिछले साल की ब्लॉकबस्टर फिल्मों पर नजर डालें तो पाएंगे कि 70 के दशक के बाद से ब्लॉकबस्टर फिल्मों की परिभाषा नहीं बदली है।"

घई ने फिल्म 'कालीचरण'(1976) से अपने निर्देशन करियर की शुरुआत की। उन्होंने साझा किया, "बाबूजी कहते हैं जब फिल्म असफल होती है तो इसका मतलब है कि निर्देशक पर्दे पर फिल्म की कहानी सुनाने में असफल है। पिछले साल 95 फीसदी फिल्में असफल रहीं? क्यों?" घई की हालिया फिल्में 'युवराज' व 'कांची: द अनब्रेकेबल' बॉक्स-ऑफिस पर असफल रहीं।

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