अंग प्रदर्शन नहीं, शोषण के खिलाफ हूं

अंग प्रदर्शन नहीं, शोषण के खिलाफ हूं
फिल्मकार राकेश ओमप्रकाश मेहरा ने अधिकांश तौर पर कम मेकअप में साधारण सी दिखने वाली एक सामान्य लड़की के रूप में अपनी नायिकाओं को प्रस्तुत किया है। अंगप्रदर्शन, भावनाओं का अतिशय प्रयोग और आइटम गीतों से वह दूर रहे हैं। वह कहते हैं कि वह अंग प्रदर्शन के खिलाफ नहीं हैं, लेकिन महिलाओं के शोषण के विरुद्ध मजबूत विचार रखते हैं।

वर्तमान में अश्लील आइटम गानों के चलन के बारे में मेहरा ने कहा, "मैं, इसमें कोई कला नहीं देखता हूं।"

यहां सिन्धु नदी के तट पर आईएएनएस के साथ विशेष बातचीत में मेहरा ने कहा, "मैं अंग प्रदर्शन के खिलाफ नहीं हूं। अगर यह कहानी का हिस्सा हो तो जरूर करें। हमारा शरीर खूबसूरत है, लेकिन पैसे के लिए शोषण और दर्शकों एवं समाज को गुदगुदाने के लिए..।" वह यहां लद्दाख इंटरनेशनल फिल्म महोत्सव के दूसरे संस्करण के लिए आए हुए थे।

50 वर्षीय मेहरा ने कहा, "फिल्मकार और कलाकार समाज का एक अंग हैं। उन्हें विषयाश्रित बनाने की कोई वजह नहीं है। मेरे ख्याल से इसके पीछे सिर्फ ग्लैमर की लालसा होती है। इनको हतोत्साहित किया जाना चाहिए।"

चाहे मेहरा की 'रंग दे बसंती' की सोहा हों या 'दिल्ली-6' की सोनम कपूर, सभी भावपूर्ण किरदारों में थीं, इनमें अंगप्रदर्शन नहीं था। जबकि, 'भाग मिल्खा भाग' में अभिनेत्री द्वारा किया गया अंग प्रदर्शन व कामुक गीत प्रभाव छोड़ने के लिए था। यह तथ्य वह अपनी बात से साबित कर चुके हैं।

उन्होंने कहा, "जो चल रहा है सिनेमा उसी को दिखाता है। लेकिन मैं कहूंगा कि सही ढंग से नहीं दिखाता।"

मेहरा के मुताबिक, दर्शकों को इसके विरुद्ध एक कदम आगे आना चाहिए।

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