अपनी बात-चीत​ में किसे निशाना बना रहे हैं ऋतिक रोशन?

अपनी बात-चीत​ में किसे निशाना बना  रहे हैं ऋतिक रोशन?
ऋतिक कुछ समय से अपने कुछ दूसरे अभिनेता साथियों के गुप्त कथन, जिसमें उन्होंने जताया हैं कि वह ऋतिक कि सफलता से असुरक्षित हैं को लेकर अपने बयान दिए हालाँकि ऋतिक ने बयान में उनके नाम नहीं लिए है। जिसके बाद से सभी इस बात को लेकर उत्सुक हो गये हैं कि वह किसके बारे में बात कर रहे है।

कल ऋतिक ने ​अपने एक बयान में अपनी नाराजगी जाहिर करते हुए कहा कि कैसे इंडस्ट्री उनके और उनके पिता को निशाना बना रही है। ​​यहीं नहीं उनके अलावा उनकी फ़िल्म 'कृष-3' को भी अनावश्यक आलोचना का शिकार बनाया जा रहा है।

​​ऋतिक द्वारा दिए इस बयान ने बी-टाउन में खलबली मचा दी। जिसके बाद सभी इस सोच में पड गये कि यह किस के लिए कहा जा रहा है। इसके बाद दो अभिनेताओं द्वारा फिल्मों के बॉक्स ऑफिस घमंड की रिपोर्ट को लेकर इंडस्ट्री हरकत में आ गई, जिन्होंने कहा था कि 'कृष-3' के बारे में बढ़ा-चढ़ा कर बताया गया है। इसके बाद फ़िल्म को मिली सफलता के बाद एक नंबर- गेम शुरू हो गया और जिसके बाद यह तो साफ़ हो गया कि वह पीछे नहीं रहना चाहते थे।

​एक सूत्र के अनुसार, "यह असुरक्षा का साफ चिन्ह है, जितना बड़ा अभिनेता होता है असुरक्षा की भावना उतनी ही ज्यादा बढ़ जाती है। जब रोशन ने 'कृष-3' की कमाई खुलासा किया तो इन दोनों अभिनेताओं ने इस रेस में आगे निकलने का संकेत देते हुए यह भी इशारा किया कि 'कृष-3' की कमाई को बढ़ा-चढ़ा कर बताया गया है।

इंडस्ट्री​ के एक सूत्र का कहना है, "कुछ सालों पहले, ए श्रेणी की एक फ़िल्म के रिलीज होने के तुरंत बाद उनके दूसरे प्रतिद्वंदी ने ट्रेड पंडितों और मीडिया को दूसरी फ़िल्म को लेकर सन्देश भेजा। आजकल यह बेहद आम हो चुका है कि एक अभिनेता की असफलता का उसके विरोधियों के द्वारा जश्न मनाया जाता है।

​ऋतिक का कहना है कि इंडस्ट्री के कुछ लोगों और मीडिया के कुछ ​​वर्गों​ ​पर मुझे नीचा दिखाने का भूत चढ़ा हुआ है। मैंने अपनी चुप्पी को अब तक बना कर रखा है। लेकिन अब इस अपमानजनक जोड़तोड़ रोकने की जरूरत ​ है। 'कृष-3' ने भारत में लगभग 244 करोड़ का व्यापार किया हैं और वहीं विदेश में मिलकर इसने कुल कमाई 55 करोड़ की है। मुझे अचंभा हो रहा हैं कि ये कौन हैं जो इन नंबरों और मेरी सफलता से इतने प्रभावित हो रहे है। मैं उनसे यही कहना चाहूंगा कि दूसरों की सफलता से असुरक्षित होने की जरुरत नहीं है, उन्हें अपने काम पर ध्यान देने की जरुरत हैं जो उन्हें वह हांसिल करने में मदद करेगा करना चाहते है। "कर्म में विश्वास करो" ​जैसे मैं और मेरे पापा करते है। और एक और बात कि मेरे पिता और मैंने एक टीम के रूप में अभी सिर्फ शुरुआत की है।

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