मूवी रेविएवस



फ़िल्म का संगीत कुल मिला कर अच्छा है। और शुरुआत होती है 'अपना काम बनता भाड़ में जाए जनता' हैं से जो समाज की सच्चाई को संगीत के जरिये प्रस्तुत करता है। वहीं सलमान खान और डेजी शाह......

वहीं नसीरुद्दीन पर फिल्माई गई राहत फ़तेह अली खान की गई ग़ज़ल 'ना बोलू तो कलेजा फूंके' का कोई जवाब नहीं है। इसके अलावा दिल का मिजाज इश्किया भी सुनने में मधुर गाना है......

फ़िल्म की ही तरह इसके गाने भी एक से बढ़ कर एक सिरदर्द है। 'बंदा हूँ मैं माइंड ब्लास्टिक', 'आई लव संइया जी' जैसे गानों को याद रखना तो दूर देखते और सुनते समय भी......

अभिषेक बच्चन ने हर बार की तरह इस बार भी अपने जय दीक्षित के किरदार को बना कर रखा है। उनके किरदार में कुछ नया तो नहीं था लेकिन उनकी हर......

इनके अलावा सटाके ठोको, 'सामने हैं सवेरा', 'जय गोविंदा जय गोपाला' और तमंचे पे डिस्को। जैसे गाने है, जो ज्यादा देर दिमाग में टिकने वालों में से नहीं है। ...

फ़िल्म का संगीत विशाल-शेखर ने दिया है। जो फ़िल्म की कहानी के हिसाब से ही बजता है। साथ ही 'धत्त तेरे की' चिंगम चबा के' जैसे गानों को काफी......

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