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'मद्रास कैफे' विवादास्पद, इसलिए प्रभाव छोड़ रही : शोभा डे

'मद्रास कैफे' विवादास्पद, इसलिए प्रभाव छोड़ रही : शोभा डे
मशहूर हस्ती और लेखिका शोभा डे ने निर्माता शूजित सरकार को 'मद्रास कैफे' जैसी विवादास्पद फिल्म बनाने के लिए शाबाशी दी है। शोभा ने शुक्रवार को ट्विटर पर लिखा, "एक बंद हॉल में 'मद्रास कैफे' देखी। शूजित 'ले केरे' सरकार शाबाशी के हकदार हैं। हां, यह विवादास्पद है। इसीलिए यह अपना प्रभाव छोड़ रही है।"

अपने ट्वीट में उन्होंने सरकार को ब्रिटिश उपान्यासकार जॉन ले केरे का उल्लेख किया है। शायद यह राजनीतिक थ्रिलर देखने के बाद उन्होंने सरकार को उनके समतुल्य माना हो।

जॉन अब्राहम और वायकॉम 18 मोशन पिक्चर्स द्वारा सहनिर्मित 'मद्रास कैफे' श्रीलंकाई गृह युद्ध पर आधारित है। तमिल समर्थकों ने आरोप लगाया है कि इसमें लिट्टे कार्यकर्ताओं को गलत तरीके से दिखाया गया है।

फिर भी जॉन अब्राहम अभिनीत इस फिल्म का फिल्मी हलकों में स्वागत किया जा रहा है।

जाने माने निर्देशक मधुर भंडारकर ने ट्विटर पर लिखा है,"मैंने बहुत ही प्रभावित करने वाली फिल्म 'मद्रास कैफे' देखी। सभी ने अच्छा प्रदर्शन किया और अच्छे विस्तार और निर्देशन ने इसे देखने लायक बना दिया।"

निखिल आडवाणी ने ट्विटर पर लिखा है, "'मद्रास कैफे' देखी। मेरे पसंदीदा कहानीकारों में से एक शूजित सरकार ने इसे खरा बनाया है, बहुत साहस का काम है।"

फिल्म में नरगिस फाखरी और नवागत कलाकार राशि खन्ना ने भी भूमिका अदा की है।

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