हम में क्या कमी है!
घोडा रेस में बिक रहा है;
वकील केस में बिक रहा है;
अदालत में जज बिक रहा है;
वर्दी में फर्ज बिक रहा है;
यहाँ सब कुछ बिक रहा है;
मज़बूरी में इंसान बिक रहा है;
जुल्म का हैवान बिक रहा है;
पैसों की खातिर ईमान बिक रहा है;
गरीबों का प्राण बिक रहा है;
यहाँ सब कुछ बिक रहा है;
गेट का संत्री बिक रहा है;
पार्टी का मंत्री बिक रहा है;
खिलाडी खेल में बिक रहा है;
कानून जेल में बिक रहा है;
यहाँ सब कुछ बिक रहा है;
पर आज ऐसी हालत होते हुए भी सिर्फ हमारा माल नहीं बिक रहा है।
बहुत मंदी है।
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