मैंने सुना था प्यार ख़ुदा की मूरत होता है, पर यह भूल गया था कि वो धरती पे पत्थर के रूप में है।
जो आसानी से मिले उसको चाहना एक समझौता है, उसको पाना सफलता है, पर जब पता हो वो नहीं मिलने वाला हमें, फिर भी उसी को चाहना वो प्यार है।
जिससे मोहब्बत की जाए, उससे मुक़ाबला नहीं किया जाता।
तु ही बता दिल तुझे समझाऊं कैसे;
जिसे चाहता है तु उसे नज़दीक लाऊं कैसे;
यूँ तो हर तमन्ना हर एहसास है वो मेरा;
मगर उस एहसास को यह एहसास दिलाऊं कैसे!
हमने दिल को लाख समझाया;
कि उन्हें याद करना छोड़ दो;
पर दिल ने कहा उन्हें कैसे छोड़ दूं;
जो सांसों में बसा हो, तो सांस लेना कैसे छोड़ दूं।
उल्फ़त में कभी यह हाल होता है;
आँखें हस्ती हैं मगर दिल रोता है;
मानते हैं हम जिसे मंज़िल अपनी;
हमसफ़र उसका कोई और होता है!
क्यों किसी से इतना प्यार हो जाता है;
एक पल का इंतज़ार भी दुश्वार हो जाता है;
लगने लगते हैं अपने भी पराये;
और एक अजनबी पर ऐतबार हो जाता है।
कितना प्यार करते हैं हम उनसे;
काश उन्हें भी यह एहसास हो जाए;
कहीं ऐसा ना हो कि होश में तब आए;
जब हम किसी और के हो जाएँ!
प्यार में कुछ-कुछ होता है;
प्यार में दिल तो पागल है;
प्यार में कभी ख़ुशी कभी गम;
प्यार एक ऐसी पहेली है जो ना तुम जानो ना हम।
सिर्फ सितारों में होती मोहब्बत अगर;
इन अल्फाजों को खूबसूरती कौन देता;
बस पत्थर बनकर रह जाता ताज महल;
अगर इश्क़ इसे अपनी पहचान ना देता।



