खुदा करे हर रात चाँद बनकर आये;
दिन का उजाला शान बनकर आये;
कभी दूर न हो आपके चेहरे से हंसी;
हर दिन ऐसा मेहमान बनकर आये।
सुप्रभात!
'सुबह' के "फूल खिल" गए;
'पंछी' अपने 'सफ़र' पे 'उड़' गए;
'सूरज' आते ही 'तारे' भी 'छुप' गए;
क्या आप अपनी "मीठी नींद" से "उठ गए?"
सुप्रभात!
आज का दिन आपको हर वो ख़ुशी दे;
जिसकी आप खुदा से उम्मीद रखते हो।
सुप्रभात!
कभी सुबह सुहानी होगी;
जब रात आपकी दीवानी होगी;
खूब मिलेंगे दुनिया की राहों में;
जो हमसे आपकी कहानी होगी।
सुप्रभात!
उठकर देखिये सुबह का 'नजारा;'
हवा भी है ठंडी और मौसम भी है प्यारा;
सो गया चाँद और छुप गया हर एक सितारा;
"क़बूल हो आपको" सलाम-ए-सुबह हमारा।
सुप्रभात!
जरा देखना उठ गए साहब नींद से या नहीं ए दिल;
सुना है बहुत सोते हैं ये हुस्न वाले।
सुप्रभात!
ए हवा तू उधर तो जाती होगी;
उनको हमारा हाल तो बताती होगी;
ज़रा छू कर तो देख उनके दिल को;
क्या याद उनको भी हमारी आती होगी।
सुप्रभात!
फिर उम्मीदों भरी सुबह आई है;
सूरज को साथ लाई है;
हमारी दोस्ती का ये असर तो देखो;
कि हवायें भी आपको "गुड मॉर्निंग" कहने आई हैं।
सुप्रभात!
सोचा किसी अपने से बात करें;
अपने किसी ख़ास को याद करें;
किया जो फैसला सुबह की शुभकामनायें देने का;
दिल ने कहा क्यों ना आप से शुरुआत करें।
सुप्रभात!
जाने कब सुबह-सुबह वो रिश्ता बन गया;
अनजाना जाने कब अपना बन गया;
हमें एहसास भी न हुआ और;
कोई हमारी सुबह की जरुरत बन गया।
सुप्रभात!



