सवेरे सवेरे हो खुशियों का मेला;
न लोगों की परवाह, न दुनिया का झमेला;
पंछियो का संगीत हो और मौसम अलबेला;
मुबारक हो आपको ये ख़ूबसूरत सवेरा।

"मधुरम् मधुरम्" प्रातःकाले
"शीतलम् शीतलम्" पवनः
"ऊष्णम् ऊष्णम्" ऊष्णोदकम्
सर्वे जनाः कथयन्ति
शुभ प्रभातम्!

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