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एक निश्चित बिंदु के बाद, पैसे का कोई अर्थ नहीं रह जाता।

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एक बेवकूफ और उसके पैसे जल्द ही अलग-अलग हो जाते है।

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सभी धन की शुरुआत दिमाग से होती है, दौलत विचारों में है, पैसों में नहीं।

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मैं बस एक मौका चाहता हूँ ये साबित करने के लिए कि पैसा मुझे खुश नहीं कर सकता।

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इंसान अगर लोभ को ठुकरा दे तो बादशाह से भी ऊंचा दर्जा हासिल कर सकता है, क्‍योंकि सब्र ही इंसान का माथा हमेशा ऊंचा रख सकता है।

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वो करिए जो आप सचमुच करना चाहते हैं फिर पैसा अपने आप आएगा।

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आमदनी भी तभी बढती है, जब आपके अच्छे कर्मों का उदय होता है।

मुश्किलें आदमी को मनुष्य बनाती है, और संपत्ति राक्षस।

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तुम ईश्वर और धन दोनों की पूजा एक साथ नहीं कर सकते।

आमदनी भी तभी बढती है, जब आपके पुण्य का उदय हो।