प्रेम किसी बाधा को नहीं जानता, ये अपनी मंजिल तक पहुँचने के लिए बाधाएं लांघ जाता है, बाड़े फांद जाता है और दीवारें बेध देता है।
अगर आपके अन्दर बस एक मुस्कान बची है तो उसे उन्हें दीजिये जिनसे आप प्रेम करते है।
प्रेम अथक चाहत पाने की एक अथक इच्छा है।
प्यार एक वायरस की तरह है, यह किसी भी समय किसी को भी हो सकता है।
प्रेम ऐसी परिस्थिति है, जिसमें दूसरे व्यक्ति की ख़ुशी आपके लिए आपकी ख़ुशी से ज्यादा मायने रखती है।
सभी प्रकार की घृणा का अर्थ है आत्मा के द्वारा आत्मा का हनन। इसलिए प्रेम ही जीवन का यथार्थ नियामक है। प्रेम की अवस्था को प्राप्त करना ही सिद्धावस्था है।
कृत्रिम प्रेम बहुत दिनों तक चल नहीं पाता, स्वाभाविक प्रेम की नकल नहीं हो सकती।
वह जो हमारे चिंतन में रहता है वह करीब है, भले ही वास्तविकता में वह बहुत दूर ही क्यों ना हो, लेकिन जो हमारे ह्रदय में नहीं है वो करीब होते हुए भी बहुत दूर होता है।
प्रेम एक मात्र वह भविष्य है, जिसका भगवान प्रस्ताव देता है।
हो सकता है कि मरने के बाद हमसे बिछडे लोग सितारे ना बने हो, लेकिन स्वर्ग में जहाँ वे खो गये है, वहाँ से हमारे ऊपर चमकते हुए ये सितारे हमें बताना चाहते है कि वे बहुत खुश है।



