लोग और उनके धर्म सामाजिक मानकों द्वारा; सामजिक नैतिकता के आधार पर परखे जाने चाहिए। अगर धर्म को लोगो के भले के लिए आवशयक मान लिया जायेगा तो और किसी मानक का मतलब नहीं होगा।
समाजवाद ना केवल जीने का तरीका है, बल्कि समाजिक और आर्थिक समस्याओं के निवारण के लिए एक वैज्ञानिक दृष्टिकोण है।
मैं ऐसे धर्म को मानता हूँ जो स्वतंत्रता, समानता और भाईचारा सिखाता है।
जो लोग आपको परेशान करते हैं उनसे ज्यादा उन लोगों पर ध्यान दो जो आपको प्रेरित करते हैं। आप को जीवन में बहुत कुछ मिलेगा।
एक राष्ट्र की महानता और उसकी नैतिक प्रगति को इस बात से आंका जा सकता है कि वहां उनके पशुओं से कैसा वयवहार होता है।
कुछ लोग आलोचक ही रहते हैं चाहे आप कुछ भी करो। इसे व्यक्तिगत रूप से यह मत लो। यह आप की तुलना में उनके बारे में अधिक है।
एक सभ्य तरीके से आप दुनिया हिला सकते हैं।
दुनिया इच्छुक लोगों से भरी पड़ी है; कुछ काम करने के लिए इच्छुक हैं, कुछ उन्हें काम करने देने के इच्छुक हैं।
सबसे बड़ी बीमारियों में से एक है किसी के लिए कुछ भी न बन पाना है।
स्वस्थ नागरिक किसी भी देश की सबसे बड़ी संपत्ति हो सकते हैं।



