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जो आपसे जलते हैं उनसे घृणा कभी ना करें, क्योंकि यही वो लोग हैं जो यह समझते हैं कि आप उनसे बेहतर है।

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दुष्टो के साथ दुष्टों के जैसा ही व्यवहार करें।

बुराई इस लिए नहीं पनपती कि बुरा करने वाले लोग बढ़ गये हैं बल्कि इसलिए पनपती हैं कि इसे सहन करने वाले लोग बढ़ गये है।

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उन लोगों से दूर रहो जो आपके सामने अच्छे बनते है, और पीठ पीछे आपकी चुगली करते है। ऐसे लोगों से बात करने से बेहतर हैं कि जानवरों के साथ वक़्त बिताओ।

​बहुत से ऐसे लोग हैं जो इस लिए आत्महत्या नहीं करते कि लोग पता नहीं क्या सोचेंगे।

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नजर अंदाज करों उन लोगों को जो आपकी पीठ पीछे आपके बारे में बातें करते है, क्योंकि वे उसी जगह है, जहाँ वे रहने के लायक है, 'आपके पीछे'

​मैंने एक बार पढ़ा था कि जो लोग दूसरों को पढ़ते हैं वो बुद्धिमान होते हैं लेकिन जो खुद को पढ़ते हैं वो प्रबुद्ध होते हैं।

विवेकी व्यक्ति खुद को दुनिया के हिसाब से ढाल लेता है, अविवेकी व्यक्ति इस कोशिश में लगा रहता है कि दुनिया उसके हिसाब से ढल जाए, इसलिए सारा विकास अविवेकी व्यक्ति पर निर्भर करता है।

दुनिया में 80 प्रतिशत लोग स्वयं को दूसरे से बेहतर और औसत से अधिक बुद्धिमान समझते है।

अपने साथी प्राणियों के प्रति सबसे बड़ा पाप उनसे घृणा करना नही बल्कि उनसे कोई मतलब ना रखना है, यही निर्दयता का सार है।

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