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अज्ञान जैसा कोई दूसरा दुश्मन नहीं है।

दो लोगों के बीच इस तरह से रहो कि अगर उनकी दोस्ती हो जाए तो, आपको शर्मिंदा ना होना पड़े।

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पिता, एक बेटे का सबसे पहला हीरो होता है, और एक बेटी का सबसे पहला और सच्चा प्यार।

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पिता की सेवा करना जिस प्रकार कल्याणकारी माना गया है वैसा प्रबल साधन न सत्य है, न दान है और न यज्ञ हैं।

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प्रेम से देती है, वह है बहन;
झगङकर देता है, वह है भाई;
पूछकर देता है, वह है पिताजी;
और बिना माँगे सबकुछ दे देती है वह है, 'माँ'

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कभी भी उनसे मित्रता मत कीजिये जो आपसे कम या ज्यादा प्रतिष्ठा के हों। ऐसी मित्रता कभी आपको ख़ुशी नहीं देगी।

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हर मित्रता के पीछे कोई ना कोई स्वार्थ होता है। ऐसी कोई मित्रता नहीं जिसमे स्वार्थ ना हो। यह कड़वा सच है।

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मित्रता हमेशा एक मधुर ज़िम्मेदारी है, अवसर कभी नहीं।

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किसी भी रिश्ते को सिर्फ तभी पूर्ण रूप से निभाया जा सकता है जब उसमे प्रेम और विश्वास के साथ-साथ परस्पर सम्मान भी हो।

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