जिनके भीतर नफरत होती है, वे दरअसल हारे हुए लोग होते हैं, जो अपने जीते हुए होने का स्वांग कर रहे होते हैं।
महापुरुषों के लिए विफलता शिक्षक होती हैं।
विफलता और कुछ नहीं बस सिर के बल कड़ी सफलता ही है।
सफलता सही निर्णय के बाद आती है और सही निर्णय असफलता के बाद।
समस्त सफलताएं कर्म की नींव पर आधारित होती हैं।
जो व्यक्ति शक्ति न होते हुए भी मन से हार नहीं मानता, उसको दुनिया की कोई भी ताकत हरा नहीं सकती है।
इंसान असफल तब नहीं होता जब वो हार जाता है। असफल तब होता है जब वो यह सोच ले कि अब वो जीत नहीं सकता।
यदि आप दृढ़ संकल्प और पूर्णता के साथ काम करेंगे तो सफलता अवश्य मिलेगी।
कामयाबी और नाकामयाबी दोनों ज़िंदगी के हिस्से है। दोनों ही स्थायी नहीं हैं।
आत्म विश्वास सफलता का पहला रहस्य है।



