परिश्रम सौभाग्य की जननी है।
प्रसन्नता पहले से निर्मित कोई चीज नहीं है, ये आप ही के कर्मों से आती है।
कोई व्यक्ति अपने कार्यों से महान होता है, अपने जन्म से नहीं।



