ईश्वर ने समझ की कोई सीमा नहीं रखी है।
समझदारी का सही चिन्ह ज्ञान नहीं बल्कि कल्पना है।
ज्ञान का तब तक कोई मूल्य नहीं है जब तक कि आप इस का प्रयोग न करें।
बुद्धि को ढूंढो ज्ञान को नहीं, ज्ञान भूतकाल है जबकि बुद्धि भविष्यकाल है।
ज्ञान स्वयंमेव वर्तमान है, मनुष्य केवल उसका अविष्कार करता है।
मूर्ख दूसरों पर हँसते हैं और बुद्धि खुद पर हँसती है।
जब तक आप ज्ञान का प्रयोग ना करें इसका कोई महत्त्व नहीं।
अवसर बुद्धिमान के पक्ष में खड़ा रहता है।
बुद्धिमत्ता का मापदंड बदलाव की क्षमता है।
मूर्ख दूसरों पर हंसते हैं। बुद्धि खुद पर हँसती है।



