हो सकता है कि हम साथ रह न पायें;
एक दूसरे से कभी कुछ कह न पायें;
मत बढ़ाओ इतनी नज़दीकियां तुम;
कि हम दूरियां फिर सह न पायें।
दूरियां बहुत हैं मगर इतना समझ लो;
पास रह कर ही कोई ख़ास नहीं होता;
तुम इस कदर पास हो मेरे दिल के;
मुझे दूरियों का एहसास नहीं होता।
अगर ज़िद्द तुम्हारी रुठने की है;
तो हमारी ज़िद्द भी तुम्हें मनाने की है;
तुम लाख कोशिश करो हमसे दूर जाने की;
हमारी कोशिश बस ये दूरियां मिटाने की है।
दूरियां होते हुए भी सफर वही रहता है;
कोई साथ न हो पर हमसफ़र वही रहता है;
बहुत मुश्किल है ये सफ़र मोहब्बत का;
दूर होकर भी पास होने का एहसास वही रहता है।
अभी कुछ दूरियां तो कुछ फांसले बाकी हैं;
पल-पल सिमटती शाम से कुछ रौशनी बाकी है;
हमें यकीन है कि कुछ ढूंढ़ता हुआ वो आयेगा ज़रूर;
अभी वो हौंसले और वो उम्मीदें बाकी हैं।
दिल तोड़ना शायद उनकी आदत सी हो गयी है;
वरना वो तो फूल भी नहीं तोड़ते थे;
आज हमसे दूर-दूर से रहते हैं वो;
एक वक़्त था जब साथ नहीं छोड़ते थे वो!
अब तो यह चांदनी भी हमें जलाती है;
भरी महफ़िल में भी तन्हाई हमें सताती है;
जब से दूर गए हो तुम हमसे;
हमारी आँखें हर पल दब-दबाती हैं।
आँसुओं की आवाज़ कुछ और होती है;
दूरियों की आग कुछ और होती हैं;
कौन चाहता है तुम से दूर रहना,
मगर मज़बूरियों की बात कुछ और होती है।
दूरियों से फर्क पड़ता नहीं;
बात तो दिलों की नज़दीकियों से होती है;
दोस्ती तो कुछ आप जैसों से है;
वरना मुलाकात तो जाने कितनों से होती है।
आपसे दूर जाने का इरादा भी ना था;
सदा साथ रहने का वादा भी ना था;
आप भुल जाओगे हमे ये तो जानते थे;
पर इतनी जल्दी भुल जाओगे ये अंदाजा ना था।