हँस कर कुबूल क्या कर ली हर सजा हमने;
दस्तूर बना लिया दुनियां ने भी, इल्जाम लगाने का।

बचपन में हम वहां सोना पसंद करते थे जहाँ से चाँद तारे दिखें;
और आज वहाँ सोना पसंद करते हैं जहाँ चार्जर लगा सकें।

वो मंदिर भी जाता है और मस्जिद भी;
वो गुरुद्वारे भी जाता है और च‌र्च भी।
परेशान पति का कोई मजहब नहीं होता।

बदलती हुई दुनियां का ऐसा असर होने लगा, आदमी पागल और फ़ोन स्मार्ट होने लगा।

जिंदगी का एक कड़वा मजाक:

वकील चाहता है कि हम किसी विवाद में पड़ें।
चिकित्सक चाहता है कि हम बीमार पड़ें।
पुलिस चाहती है कि हम कुछ अपराध करें।
अध्यापक की नज़रों में हम पैदाइशी बेवकूफ हैं।
कफ़न बनाने वाला चाहता है कि हम मर जाएँ... पर
केवल एक चोर चाहता है कि हम सुख की नींद सोएं और धनवान रहें।

श्रीमान जी की धनि चाची की मृत्यु पर उनके मित्र ने पूछा, "इतने उदास क्यों हो? वैसे भी तुमने उस बुढ़िया की कोई ख़ास परवाह तो की नहीं।" श्रीमान जी ने परेशानी से कहा, "की तो नहीं, लेकिन पिछले पांच वर्षों से मैंने उसे पागल सिद्ध करके पागलखाने में भर्ती करवा रखा था। अब पता चला कि उसने सारी संपत्ति मेरे नाम कर रख है। समस्या यह है कि अब मुझे यह सिद्ध करना है कि उसकी दिमागी हालत दुरुस्त थी।"

लड़ाई के दिनों में जब एक सैनिक को पता चला कि उसकी प्रेमिका नर्स बन गई है तो उसने पत्र में लिखा, "दुआ करो प्रिय, यहां मेरे साथ कोई दुर्घटना हो जाए और मुझे तुम्हारे ही अस्पताल में भर्ती होना पड़े।"
दो दिन बाद पत्र का उत्तर मिला, "दुर्घटना नहीं, कोई चमत्कार ही तुम्हें मेरे पास पहुंचा सकता है, क्योंकि मेरी ड्यूटी अस्पताल के मेटरनिटी वार्ड में है।"

मंदिरों में हिन्दू देखे, मस्जिदों में मुस्लमान;
शाम को जब मयखाने गया तब जाकर दिखे इंसान!

लोग कहते हैं कि खुदा ने आप को बहुत फुर्सत से बनाया है;
सीधी सी बात है यार, फ़ालतू काम फुर्सत में ही तो किए जाते हैं।

ख़ूबसूरती और सुंदरता में बस इतना फ़र्क है कि:
ख़ूबसूरती वो है जो सबको दिखाई देती है;
और सुंदरता किसी-किसी को नज़र आती है।

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