महँगी से महँगी घड़ी पहन कर देख ली, वक़्त फिर भी मेरे हिसाब से कभी ना चला।

एक कब्रिस्तान के बाहर बोर्ड पर लिखा था: "मंज़िल तो मेरी यही थी, बस ज़िंदगी गुज़र गई मेरी यहाँ तक आते-आते!"

वक़्त की क़दर उस शख्स से पूछो, जो बाथरूम के बाहर खड़ा हो और उसे लूस मोशन(Loose Motion) हो,
और
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..
...
अंदर वाले को 'क़ब्ज़'!

सालो काम तुमसे होता नहीं और दोष मुझे देते हो।
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..
...
....
.....
आपका,
सोमवार

यहाँ हर किसी को दरारों में झाँकने की आदत है;
दरवाज़ा खोल दो, कोई पूछने भी नहीं आएगा।

लख़नवी बच्चों की लड़ाई:
पहला: देखिए अगर आप हमारी बात नहीं मानेगें तो हम आपकी वालिदा मोहतरमा की शान में गुस्ताख़ना कलिमात पेश कर देंगे।
दूसरा: हज़ूर फ़िर हम भी आपके रुखसार मुबारक पे ऐसा तमाचा रसीद करेंगे कि गाल-ए-मुबारक गुलाब की मानिंद चमक उठेगा।
यह है 'तहज़ीब-ए-लखनऊ'।

सोचने वाली बात:
भले ही आज लोग वेस्टर्न कल्चर के पीछे भागते हों पर एक बात जो याद रखनी चाहिए:
सूरज भी जब-जब वेस्ट (पश्चिम) में जाता है, डूब ही जाता है।

एक वक़्त था जब हम सोचते थे कि हमारा भी वक़्त आएगा;
और
एक ये वक़्त है कि हम सोचते हैं कि वो भी क्या वक़्त था।

तलवार 2 किस्म की होती है:
1: लोहे की
2: मोहब्बत की
फर्क सिर्फ इतना है कि लोहे वाली 1 को 2 कर देती है।
और मोहब्बत वाली 2 को 1 कर देती है।

बाल सफेद करने मे जिंदगी निकल जाती है, काले तो आधे घंटे में हो जाते है!

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