दिल में हमारी याद रखना;
चेहरे पर मुस्कुराहट रखना;
कभी कोई तुम्हें हरा न सके;
ऐसा अपना तुम मुकाम रखना।
रख हौंसला वो मंज़र भी आयेगा;
प्यासे के पास चलकर समंदर भी आयेगा;
थक कर ना बैठ अए मंजिल के मुसाफ़िर;
मंजिल भी मिलेगी और जीने का मजा भी आयेगा।
शिखर तक पहुँचने के लिए ताकत चाहिए होती है;
चाहे वो माउन्ट एवरेस्ट का शिखर हो या आपका पेशा।
जिंदगी में कुछ खोना पड़े तो ये दो पंक्तियाँ जरूर याद रखना:
जो खोया है उसका गम नहीं और जो पाया है वो भी किसी से कम नहीं।
जिंदगी उसी को अजमाती है;
जो हर मोड़ पर चलना जानते हैं;
कुछ पाकर तो हर कोई खुश रहता है;
पर जिंदगी उसी की है जो सबकुछ खोकर भी मुस्कुराना जानता है।
एक बहुत गहरी बात!
वक़्त से सीखो बदलते रहने का सबक;
क्योंकि;
वक़्त कभी खुद को बदलते नहीं थकता।
कोई व्यक्ति कितना ही महान क्यों न हो, आंखे मूंदकर उसके पीछे न चलिए।
यदि ईश्वर की ऐसी ही मंशा होती तो वह हर प्राणी को आंख, नाक, कान, मुंह, मस्तिष्क आदि क्यों देता?
केवल कर्महीन ही ऐसे होते हैं जो भाग्य को कोसते हैं;
और जिनके पास शिकायतों का बाहुल्य होता है।
जब किसी महापुरुष से पूछा गया कि गुस्सा क्या चीज़ है?
तो महापुरुष ने बहुत खूबसूरत जवाब दिया, "किसी की गलती की सज़ा खुद को देना।"
एक बहुत गहरी बात है:
वक़्त से सीखो बदलते रहने का सबक;
वक्त कभी खुद को बदलते नहीं थकता।



