धन अपना पराया नही देखता।
अपने पैसों को दौगुना करने का सबसे आसान रास्ता है कि इसे फोल्ड करो और जेब में रख लो।
सम्पत्ति उस व्यक्ति की होती है जो इसका आनन्द लेता है न कि उस व्यक्ति को जो इसे अपने पास रखता है।
ज़्यादा पैसा कमाने की इच्छा से ग्रसित मनुष्य झूठ, कपट, बेईमानी, धोखेबाज़ी, विश्वाघात आदि का सहारा लेकर परिणाम में दुःख ही प्राप्त करता है।
सेवा के लिये पैसे की जरूरत नहीं होती जरूरत है अपना संकुचित जीवन छोड़ने की, गरीबों से एकरूप होने की।
अगर औरतें नहीं होती तो इस दुनिया की सारी दौलत बेमानी होती।
साधारण धन चुराया जा सकता है, वास्तविक नहीं, आपकी आत्मा में जो असीम रूप से कीमती चीजें है उन्हें आपसे दूर कोई नहीं ले जा सकता।
ऐसे लोगों की मदद करना जो खुद अपनी मदद करने की इच्छा नहीं रखते पैसे की बर्बादी है।
आपका वेतन आपको अमीर नहीं बनाता, आपकी खर्च करने की आदत बनाती है।
जिसके पास कुछ भी कर्ज़ नहीं, वह बड़ा मालदार है।



