तू नाराज न रहा कर तुझे वास्ता है खुदा का,
एक तेरा ही चेहरा खुश देख कर तो हम अपना गम भुलाते हैं।

ये आशिकोँ का शहर है जनाब,
यहाँ सवेरा सूरज से नही, किसी के दीदार से होता है।

अक्सर नींदें चुरा लेता हूँ देखो रिस्क ही रिस्क हूँ मैं,
बिन बताये दिल में उतर जाता हूँ इश्क़ ही इश्क़ हूँ मैं।

मैं कुछ कहूँ और तेरा ज़िक्र ना आये,
उफ्फ, ये तो तौहीन होगी, तेरी चाहत की।

ज़िन्दगी के किस मोड़ पर ले आई है यह जवानी भी,
जलना होगा या डूबना होगा "अक्स" इश्क़ आग भी है और पानी भी।

बेपनाह मोहब्बत का एक ही उसूल है,
मिले या ना मिले तू हर हाल मे कबूल है।

सब पूछते हैं मुझ से क्यों रातों को मैं जागता हूँ और दिन में खोया हुआ सा रहता हूँ,
चुप रहूँ या कह दूँ अब सब से कि इस बेचैन दिल की वजह तुम हो।

नींद से क्या शिकवा जो आती नहीं रात भर,
कसूर तो उस चेहरे का है जो सोने नही देता।

तेरा अक्स गढ़ गया है आँखों में कुछ ऐसा,
सामने खुदा भी हो तो दिखता है हू-ब-हू तुझ जैसा।

मुझ से रूठकर वो खुश है तो शिकायत ही कैसी,
अब मैं उनको खुश भी ना देखूं तो हमारी मोहब्बत ही कैसी।

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