होगी कितनी चाहत उस दिल में,
जो खुद ही मान जाये कुछ पल खफा होने के बाद।
मत देखो हमें तुम यूँ इस कदर,
इश्क़ तुम कर बैठोगे और इलज़ाम हम पे लग जायेगा।
देख लेते हो मोहब्बत से यही काफी है,
दिल धड़कता है सहूलत से यही काफी है,
हाल दुनिया के सताए हुए कुछ लोगों का,
पूछ लेते हो शरारत से यही काफी है।
तुम को चाहने की वजह कुछ भी नहीं,
बस इश्क़ की फितरत है बेवजह होना।
तुम्हारी आँखों में बसा है आशियाना मेरा,
अगर ज़िन्दा रखना चाहो तो कभी आँसू मत लाना।
गुफ्तगू उनसे होती यह किस्मत कहाँ,
ये भी उनका करम है कि वो नज़र तो आये।
सजा है मौसम तुम्हारी महक से आज फिर;
लगता है हवायें तुम्हें छू कर आयी हैं।
चुपके चुपके पहले वो ज़िन्दगी में आते हैं;
मीठी मीठी बातों से दिल में उतर जाते हैं;
बच के रहना इन हुस्न वालों से यारो;
इन की आग में कई आशिक जल जाते हैं।
कौन सी बात है जो उस में नहीं,
उस को देखे मेरी नज़र से कोई।
अगर तुम्हें यकीन नहीं तो कहने को कुछ नहीं मेरे पास,
अगर तुम्हें यकीन हैं तो मुझे कुछ कहने की ज़रूरत नहीं।



