इंतज़ार मेरी उम्र से लंबा हो शायद,
तेरा आना इस मर्ज़ की दवा हो शायद।
इत्तेफ़ाक़ से ही सही मगर मुलाकात हो गयी;
ढूंढ रहे थे हम जिन्हें आखिर उन से बात हो गयी;
देखते ही उन को जाने कहाँ खो गए हम;
बस यूँ समझो दोस्तो वहीं से हमारे प्यार की शुरुआत हो गयी।
तेरे बिना टूट कर बिखर जायेंगे;
तुम मिल गए तो गुलशन की तरह खिल जायेंगे;
तुम ना मिले तो जीते जी ही मर जायेंगे;
तुम्हें जो पा लिया तो मर कर भी जी जायेंगे।
फ़िज़ा की महकती शाम हो तुम,
प्यार में छलकता जाम हो तुम,
सीने में छुपाये फिरता हूँ यादें तुम्हारी,
इसलिए मेरी ज़िन्दगी का दूसरा नाम हो तुम!
जब से मुँह को लग गई अख़्तर मोहब्बत की शराब,
बे-पिए आठों पहर मदहोश रहना आ गया।
उस की बाहों में सोने का अभी तक शौंक है मुझको,
मोहब्बत में उजड़ कर भी मेरी आदत नहीं बदली।
कहीं वो आ के मिटा दें न इंतज़ार का लुत्फ़,
कहीं क़ुबूल न हो जाए इल्तिजा मेरी।
धडकनों को कुछ तो काबू में कर ए दिल,
अभी तो पलकें झुकाई हैं मुस्कुराना अभी बाकी है उनका।
मोहब्बत मुझे थे उसी से सनम,
यादों में उसकी यह दिल तड़पता रहा,
मौत भी मेरी चाहत को न रोक सकी,
क़ब्र में भी यह दिल उसके लिए धड़कता रहा।
अब तक ख़बर न थी कि मोहब्बत गुनाह है;
अब जान कर गुनाह किए जा रहा हूँ मैं।



