लाखों में इन्तिख़ाब के क़ाबिल बना दिया;
जिस दिल को तुमने देख लिया, दिल बना दिया।
खुशबू ने फूल को एक अहसास बनाया;
फूल ने बाग को कुछ खास बनाया;
चाहत ने मोहब्बत को एक प्यास बनाया;
और इस मोहब्बत ने एक और देवदास बनाया।
आँखों में आंसुओं की लकीर बन गई;
जैसी चाहिए थी वैसी तकदीर बन गई;
हमने तो सिर्फ रेत में उंगलियाँ घुमाई थी;
गौर से देखा तो आपकी तस्वीर बन गई।
राज़-ए-हक़ीकत जानने वाले देखिये अब क्या कहते हैं;
दिल को अपना दिल नहीं कहते, उनकी तमन्ना कहते हैं।
दिल की किताब में गुलाब उनका था;
रात की नींदों में ख्वाब उनका था;
कितना प्यार करते हो जब हमने पूछा;
मर जायेंगे तुम्हारे बिना यह जवाब उनका था।
दिल में प्यार का आगाज हुआ करता है;
बातें करने का अंदाज हुआ करता है;
जब तक दिल को ठोकर नहीं लगती;
सबको अपने प्यार पर नाज हुआ करता है!
कब तक रहोगे आखिर यूं दूर हमसे;
मिलना पड़ेगा आखिर एक दिन जरूर हमसे;
दामन बचाने वाले ये बेरुखी है कैसी?
कह दो अगर हुआ है कोई कसूर हमसे!
बहते अश्कों की ज़ुबान नहीं होती;
लफ़्ज़ों में मोहब्बत बयां नही होती;
मिले जो प्यार तो कदर करना;
किस्मत हर कीसी पर मेहरबां नहीं होती।
सब कुछ है मेरे पास पर दिल की दवा नहीं;
दूर वो मुझसे हैं पर मैं खफा नहीं;
मालूम है अब भी वो प्यार करते हैं मुझसे;
वो थोड़ा सा जिद्दी है, मगर बेवफा नहीं!
Aksar Log Apni Chahat Ki Taarif Karte Hein;
Tanke Woh Khaafa Na Ho Jayein;
Hum Isliye Khamosh Rehte Hein;
Tanke Koi Aur Unpe Fida Na Ho Jaye!



