रेत पर नाम कभी लिखते नहीं;
रेत पर नाम कभी टिकते नहीं;
लोग कहते है कि हम पत्थर दिल हैं;
लेकिन पत्थरों पर लिखे नाम कभी मिटते नहीं!

महोब्बत और नफरत सब मिल चुके हैं मुझे;
मैं अब तकरीबन मुकम्मल हो चोका हूँ!

इश्क के रिश्ते कितने अजीब होते है?
दूर रहकर भी कितने करीब होते है;
मेरी बर्बादी का गम न करो;
ये तो अपने अपने नसीब होते हैं!

वो खुद पर गरूर करते है, तो इसमें हैरत की कोई बात नहीं!
जिन्हें हम चाहते है, वो आम हो ही नहीं सकते!

कोई ठुकरा दे तू हंस के सह लेना;
मोहब्बत की ताबित में ज़बरदस्ती नहीं होती!

ये वफ़ा तो उस वक्त की बात है ऐ फ़राज़;
जब मकान कच्चे और लोग सच्चे हुआ करते थे!

कोई अच्छा लगे तो उनसे प्यार मत करना;
उनके लिए अपनी नींदे बेकार मत करना;
दो दिन तो आएँगे खुशी से मिलने;
तीसरे दिन कहेंगे इंतज़ार मत करना!

कृष्ण ने राधा से पूछा: ऐसी एक जगह बताओ, जहाँ में नहीं हूँ?
राधा ने मुस्कुराके कहा, `बस मेरे नसीब में`!

चहरे पर हंसी छा जाती है!
आँखों में सुरूर आ जाता है!
जब तुम मुझे अपना कहते हो,
अपने पर गुरुर आ जाता है!

अगर तुम न होते तो ग़ज़ल कौन कहता!
तुम्हारे चहरे को कमल कौन कहता!
यह तो करिश्मा है मोहब्बत का!
वरना पत्थर को ताज महल कौन कहता!

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