किसी के दिल का दर्द किसने देखा है;
देखा है, तो सिर्फ चेहरा देखा है;
दर्द तो तन्हाई मे होता है;
लेकिन तन्हाइयो मे लोगों ने हमे हँसते हुए देखा है!
जी तो चाहता है, चीर के रख दूं तुझे;
ए दिल, न तूं रहे तुझमे और न तूं रहे मुझमें!
मेरी फितरत में नहीं अपना गम बयां करना;
अगर तेरे वजूद का हिस्सा हूँ तो महसूस कर तकलीफ मेरी!
दिए हैं ज़ख़्म तो मरहम का तकल्लुफ न करो;
कुछ तो रहने दो, मेरी ज़ात पे एहसान अपना!
रोशनी बिना दिए का मतलब ही क्या;
क्यों कहते है लोग कि मोहब्बत न कर दर्द मिलता है;
वो क्या जाने कि दर्द बिना मोहब्बत का मतलब ही क्या!
खो जाओ मुझ में तो मालूम हो कि दर्द क्या है?
ये वो किस्सा है जो जुबान से बयाँ नही होता!
जीने के लिये सोचा ही नहीं, दर्द संभालने होंगे;
मुस्कुराये तो, मुस्कुराने के क़र्ज़ उतरने होंगे!
जहाँ खामोश फिजा थी, साया भी न था;
हमसा कोई किस जुर्म में आया भी न था!
न जाने क्यों छिनी गई हमसे हंसी;
हमने तो किसी का दिल दुखाया भी न था!
आईना बन के बात करती धूप, दिल की दीवार पर बरसती धूप;
मेरे अन्दर भी धूप का आलम, मेरे बाहर भी रक्स करती धूप!
आईना बन के बात करती धूप, दिल की दीवार पर बरसती धूप;
मेरे अन्दर भी धूप का आलम, मेरे बाहर भी रक्स करती धूप!



