मुझे यकीन है मोहब्बत उसी को कहते हैं,
कि जख्म ताज़ा रहे और निशान चला जाये।

हालात ने तोड़ दिया हमें कच्चे धागे की तरह,
वरना हमारे वादे भी कभी ज़ंजीर हुआ करते थे।

मत पूछ कैसे गुज़र रही है ज़िन्दगी;
उस दौर से गुज़र रहा हूँ जो गुज़रता ही नहीं।

ज़िद मत किया करो मेरी दास्तान सुनने की
मैं हँस कर कहूँगा तो भी तुम रोने लगोगे।

बहुत ज़ालिम हो तुम भी, मोहब्बत ऐसे करते हो;
जैसे घर के पिंजरे में परिंदा पाल रखा हो।

मोहब्बत की तलाश में निकले हो तुम अरे ओ पागल,
मोहब्बत खुद तलाश करती है जिसे बर्बाद करना हो।

रोज़ सोचा है भूल जाऊँ तुझे,
फिर रोज़ ये बात भूल जाता हूँ।

अग़र मोहब्बत नही थी तो फक़त एक बार बताया तो होता,
ये कम्बख़त दिल तुम्हारी ख़ामोशी को इश्क़ समझ बैठा।

लोग कहते है हर दर्द की एक हद होती है,
कभी मिलना हमसे हम वो हद अक्सर पार करके जाते हैं।

उसे उड़ने का शौक था और हमें उसके प्यार की कैद पसंद थी,
वो शौक पूरा करने उड़ गयी जो आखिरी सांस तक साथ देने को रजामंद थी।

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