पा लिया था दुनिया की सबसे हसीन को;
इस बात का तो हमें कभी गुरूर न था;
वो रह पाते पास कुछ दिन और हमारे;
शायद यह हमारे नसीब को मंज़ूर नहीं था।
इस बहते दर्द को मत रोको;
यह तो सज़ा है किसी के इंतज़ार की;
लोग इन्हे आँसू कहे या दीवानगी;
पर यह तो निशानी है किसी के प्यार की।
इन्हीं रास्तों ने जिन पर मेरे साथ तुम चले थे;
मुझे रोक रोक पूछा तेरा हम-सफ़र कहाँ है।
कहने देती नहीं कुछ मुँह से मोहब्बत मेरी;
लब पे रह जाती है आ आ के शिकायत मेरी।
बिन बताये उसने ना जाने क्यों ये दूरी कर दी;
बिछड़ के उसने मोहब्बत ही अधूरी कर दी;
मेरे मुकद्दर में ग़म आये तो क्या हुआ;
खुदा ने उसकी ख्वाहिश तो पूरी कर दी।
मेरे दिल में न आओ वरना डूब जाओगे;
ग़म-ए-अश्कों के सिवा कुछ भी नहीं अंदर;
अगर एक बार रिसने लगा जो पानी;
तो कम पड़ जायेगा भरने के लिए समंदर।
आज उसने हमें एक और दर्द दिया तो हमें याद आया;
कि दुआओं में हमने ही तो उसके सारे दर्द मांगे थे।
खुश रहे तू है जहाँ, ले जा दुआएं मेरी;
तेरी राहों से जुदा हो गयी हैं राहें मेरी;
कुछ नहीं पास मेरे अब खाली हाथ हैं;
किसी और की नहीं सब खतायें हैं मेरी।
जमीन छुपाने के लिए गगन होता है;
दिल छुपाने के लिए बदन होता है;
शायद मरने के बाद भी छुपाये जाते हैं गम;
इसीलिए हर लाश पे कफ़न होता है।
शीशे में डूब कर पीते रहे उस जाम को;
कोशिशें की बहुत मगर भुला न पाए तेरे एक नाम को।



