दिल में है तड़प आँखों में आंसू;
क्या इसी का नाम जुदाई है लोगो।
जुबां पे मोहर लगाना कोई बड़ी बात नहीं;
बदल सको तो बदल दो मेरे खयालों को।
वो भी बहुत अकेला है शायद मेरी तरह;
उस को भी कोई चाहने वाला नहीं मिला।
किया इश्क़ ने मेरा हाल कुछ ऐसा;
ना अपनी खबर ना ही दिल का पता है;
कसूरवार थी मेरी ये दौर-ए-जवानी;
मैं समझता रहा सनम की खता है।
कुछ ऐसे बंधन होते हैं जो बिन बांधे बंध जाते हैं;
जो बिन बांधे बंध जाते हैं वो जीवन भर तड़पाते है।
उनके देखे से जो आ जाती है मुँह पे रौनक;
वो समझते हैं कि बीमार का हाल अच्छा है।
जब लगा था "तीर" तब इतना "दर्द" न हुआ ग़ालिब...
"ज़ख्म" का एहसास तब हुआ जब "कमान" देखी अपनों के हाथ में।
कोई नहीं करता अब इम्दाद मेरे दिल की;
दुश्मन तो दुश्मन, अपने भी तड़पाते हैं।
ग़म के दरियाओं से मिलकर बना है यह सागर;
आप क्यों इसमें समाने की कोशिश करते हो;
कुछ नहीं है और इस जीवन में दर्द के सिवा;
आप क्यों इस ज़िंदगी में आने की कोशिश करते हो।
फिर कहीं से दर्द के सिक्के मिलेंगे:
ये हथेली आज फिर खुजला रही है।



