किसी भी मुश्किल का अब किसी को हल नही मिलता;
शायद अब घर से कोई माँ के पैर छूकर नही निकलता...
जो जुर्म करते है वो इतने बुरे नहीं होते;
सजा ना देकर अदालत बिगाड़ देती है।
हादसा एक दम नहीं होता;
वक़्त करता है परवरिश बरसों...
ख़ुदा ने ये सिफ़त दुनिया की हर औरत को बख्शी है;
के वो पागल भी हो जाए तो बेटे याद रहते है।
किसी की गलतियों को बेनक़ाब ना कर;
'ईश्वर' बैठा है, तू हिसाब ना कर।
हद-ए-शहर से निकली तो गाँव गाँव चली;
कुछ यादें मेरे संग पांव पांव चली;
सफ़र जो धूप का किया तो तजुर्बा हुआ;
वो जिंदगी ही क्या जो छाँव-छाँव चली।
खुदा आज भी है ज़मीं पर, ये मुझको यकीं;
बस उसको देखने वाली निगाह चाहिए।
सर झुकाने से नमाजें अदा नहीं होतीं;
दिल झुकाना पड़ता है, इबादत के लिए।
हज़ारों ऐब ढूँढ़ते है हम दूसरों में इस तरह;
अपने किरदारों में हम लोग,फरिश्तें हो जैसे।
तालीम नहीं दी जाती परिंदों को उड़ानों की;
वह तो खुद ही समझ जाते हैं ऊंचाई आसमानों की।



