जब मिलो किसी से तो जरा दूर का रिश्ता रखना;
बहुत तङपाते हैं अक्सर सीने से लगाने वाले!
दिल का क्या है तेरी यादों के सहारे जी लेगा,
हैरान तो आँखें हैं तड़पती हैं तेरे दीदार को।
कोई दीवाना कहता है, कोई पागल समझता है;
मगर धरती की बेचैनी को बस बादल समझता है;
मैं तुझसे दूर कैसा हूँ, तू मुझसे दूर कैसी है;
ये तेरा दिल समझता है, या मेरा दिल समझता है!
तुम नाराज हो जाओ, रूठो या खफा हो जाओ;
पर बात इतनी भी ना बिगाड़ो की जुदा हो जाओ!
भूल तो जाऊं तुझे;
फिर मेरे पास रहेगा क्या!
मेरी आँखों में आँसू नहीं बस कुछ नमी है;
वजह आप नही आप की कमी है!
फिर खो न जाएँ हम कहीं दुनिया की भीड़ में;
मिलती है पास आने की मोहलत कभी कभी!
मिलना इतिफाक था बिछरना नसीब था;
वो तुना हे दूर चला गया जितना वो करीब था;
हम उसको देखने क लिए तरसते रहे;
जिस शख्स की हथेली पे हमारा नसीब था!
शायद कुछ दिन और लगेंगे, ज़ख़्मे-दिल के भरने में;
जो अक्सर याद आते थे, वो कभी-कभी याद आते हैं!
बदल गया वक़्,त बदल गयी बातें, बदल गयी मोहब्बत;
कुछ नहीं बदला तो वो है इन आँखों की नमी और तेरी कमी।



