केवल ज़रूरी चीज़ें ही खुलेंगी! स्कूल, कॉलेज बंद रहेंगे!
और हम समझते रहे पढ़ाई ज़रूरी है, लेकिन ज़रूरी तो शराब है!
कभी सोचा नहीं था, ऐसे भी दिन आएँगें;
छुट्टियाँ तो होंगी पर, मना नहीं पाएँगे।
वक़्त वक़्त की बात है,
कभी एकांत अच्छा लगता था, अब अपनों की भीड़ देखनो को आँखे तरस गयी हैं!
सोचिये ज़रा ऐसा कौन सा सामूहिक कर्म किया होगा हम सबने जो सभी को एक जैसी सजा मिली है!
भारत एक ऐसा देश है जहाँ सरकरी कर्मचारी काम ना करने की सैलरी लेता है और काम करने की रिश्वत!
ज़िन्दगी तो ऐसे कट रही है,
जैसे पुरखों ने बहुत बड़ी रियासत छोड़ रखी हो!
ज़िन्दगी ऐसे मोड़ पर ले आई है कि...
अब मोड़ तक भी नहीं जा सकते।
महंगे-महंगे ब्रांडेड कपडे खूंटी पर टंगे रह गए और बिना कंपनी वाला "मास्क" बाज़ी मार गया!
किसी का हाथ छूना नहीं है लेकिन किसी का साथ छोड़ना नहीं है!
बात संस्कार और नियत की है!
दुनिया को वायरस चीन ने दिया और दवा भारत दे रहा है!



