दुनिया का दस्तूर ही कुछ अजीब है, दौलत चाहे कितनी भी बेईमानी से आये;
लेकिन उसकी रखवाली के लिए सबको ईमानदार शख्स ही चाहिए।
एक बात हमेशा याद रखना दोस्तों,
ढूंढने पर वही मिलेंगे जो खो गए थे,
वो कभी नहीं मिलेंगे जो बदल गए हैं।
ज़िन्दगी के उसूल भी "कबड्डी" के खेल की तरह हैं,
जैसे ही "सफलता" की लाइन को छूते हैं लोग लग जाते हैं पीछे खींचने में।
हर एक इंसान हवा में उड़ता फिरता है,
फिर भी ना जाने ज़मीन पर इतनी भीड़ क्यों है।
हमारे देश में बदलाव नहीं आता, क्योंकि:
गरीब में हिम्मत नहीं;
मिडिल क्लास को फुर्सत नहीं;
और अमीरों को ज़रूरत नहीं।
पीतल के पतीले में पपीता पीला पीला।
प्राइवेट कर्मचारी: आज मेरे पास गाडी है, बंगला है, नौकर-चाकर हैं, तुम्हारे पास क्या है?
सरकारी कर्मचारी: मेरे पास छुट्टी है।
लड़का और लड़की दोनों रेस्त्रां में खाना खाने गए। खाना खाते लड़की रोमांटिक अंदाज़ में लड़के से बोली,
"जानू, कुछ ऐसा कहो कि मेरा दिल ज़ोर - ज़ोर से धड़के।"
लड़का: मेरे पास पैसे नहीं हैं... बिल देने के लिए।
आज का ज्ञान:
दोस्त और बीवी को कभी विश्वास दिलाने की जरुरत नही होती। क्योकि...
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दोस्त कभी शक नही करता और बीवी कभी यकीन नही करती।
तुम मेरे लिए उतने ही जरूरी हो, जितने 31 मार्च तक सारे टारगेट पूरे करना।
~ सेल्स मैन आशिक!



