रिश्ते और रास्ते एक ही सिक्के के दो पहलू हैं, कभी रिश्ते निभाते निभाते रास्ते खो जाते हैं और कभी रास्तों पर चलते चलते रिश्ते बन जाते हैं।
शब्द मुफ्त मिलते हैं, आप जिस तरह उपयोग करें, वैसी कीमत चुकानी पड़ती है।
"धर्म" से "कर्म" इसलिए महत्वपूर्ण है, क्योंकि "धर्म" करके भगवान से मांगना पडता है,
जबकि "कर्म" करने से भगवान को खुद ही देना पडता है।
बदलाव ही जीवन का सार है, जहाँ बदलाव नहीं वहां जीवन नहीं।
अगर दूसरों को दुखी देख कर आपको भी दुःख होता है तो समझ लो कि भगवान ने आपको बना कर कोई गलती नहीं की है।
ताश के पत्तों में इक्का और ज़िंदगी में सिक्का जब चलता है तो दुनिया सलाम ठोकती है।
क्षमता और ज्ञान को अपना गुरु बनाओ, अपना गुरूर नहीं।
भगवान और इंसान में इतना ही फ़र्क़ है कि
भगवान "तन" से पत्थर और इंसान "मन" से पत्थर।
सबसे अधिक ज्ञानी वही है जो अपनी कमियों को समझकर उनका सुधार कर सकता हो।
भूल होना 'प्रकृति' है,
मान लेना 'संस्कृति' है,
सुधार लेना 'प्रगति' है।



