नहीं बसती किसी और की सूरत अब इन आँखो में,
काश कि हमने तुम्हें इतने गौर से ना देखा होता।
जीने के लिए जान जरुरी है, हमारे लिए तो आप जरुरी हैं;
मेरे चेहरे पे चाहे गम हो, आपके चेहरे पे मुस्कान जरुरी है।
ये कहाँ मुमकिन है कि हर लफ़्ज़ बयाँ हो;
कुछ परदे हो दरमियाँ ये भी तो लाज़मी है।
तलब उठती है बार-बार तेरे दीदार की,
ना जाने देखते देखते कब तुम लत बन गए।
सुनो बहुत इंतजार करता हूँ तुम्हारा;
सिर्फ एक कदम बढा दो बाकी के फासले मैं खुद तय कर लूँगा।
याद रखते हैं हम आज भी उन्हें पहले की तरह;
कौन कहता है फासले मोहब्बत की याद मिटा देते हैं।
तुझे छोड़ दूं तुझे भूल जाँऊ, कैसी बातें करते हो;
सूरत तो फिर भी सूरत है, मुझे तो तेरे नाम के लोग भी अच्छे लगते हैं।
तलब उठती है बार-बार तेरे दीदार की;
ना जाने देखते-देखते कब तुम लत बन गये।
मैं तुम्हारी कुछ मिसाल तो दे दूँ मगर जानां,
जुल्म ये है कि बे-मिसाल हो तुम।
प्यार अगर सच्चा हो तो कभी नहीं बदलता,
ना वक्त के साथ ना हालात के साथ।



