कब तक होश संभाले कोई, होश उड़े तो उड़ जाने दो;
दिल कब सीधी राह चला है, राह मुड़े तो मुड़ जाने दो।

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नक़ाब क्या छुपाएगा शबाब-ए-हुस्न को;
निगाह-ए-इश्क तो पत्थर भी चीर देती है।

मोहब्बत एक नाम है दर्द और ख़ुशी की कहानी का;
मोहब्बत एक नाम है हर पल मुस्कुराने का;
ये कोई लम्हा दो लम्हों की पहचान नहीं है;
मोहब्बत एक नाम है हर पल साथ निभाने का।

होठों पर मोहब्बत के फ़साने नहीं आते;
साहिल पर समंदर के खजाने नहीं आते;
पलकें भी चमक उठती हैं सोते हुए हमारी;
आँखों को अभी ख्वाब छुपाने नहीं आते।

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फ़िज़ा को महकाती शाम हो तुम;
प्यार में छलकता जाम हो तुम;
तुम्हें दिल में छुपाये फिरते हैं;
मेरी ज़िंदगी का दूसरा नाम हो तुम।

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मैंने अपनी हर एक सांस तुम्हारी गुलाम कर रखी है;
लोगों में ये ज़िन्दगी बदनाम कर रखी है;
अब ये आइना भी क्या काम का मेरे;
मैंने तो अपनी परछाई भी तुम्हारे नाम कर रखी है।

यूँ ही तो नहीं दिल मेरा तुझे तलाशता फिरता;
कर यकीन मंज़िल का तू ही है किनारा मेरा;
यूँ ही तो नहीं आयी सदा तेरी हवाओं में बह कर;
हौले से तूने ही होगा नाम पुकारा मेरा।

अरे आप क्यों नहीं समझते हो सनम;
दिल का दर्द दबता नहीं है दबाने से;
आपको मोहब्बत का इज़हार करना ही पड़ेगा;
क्योंकि मोहब्बत छुपती नहीं छुपाने से।

वो बात क्या करूँ जिसकी खबर ही न हो;
वो दुआ क्या करूँ जिसमे असर ही न हो;
कैसे कह दूँ आपको लग जाये मेरी भी उम्र;
क्या पता अगले पल मेरी उम्र ही न हो।

छुपा लूंगा तुझे इस तरह से मेरी बाहों में;
हवा भी गुज़रने के लिए इज़ाज़त मांगे;
हो जाऊं तेरे इश्क़ में मदहोश इस तरह;
कि होश भी वापस आने के इज़ाज़त मांगे।

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