जब आंसू आए तो रो जाते हैं;
जब ख्वाब आए तो खो जाते हैं;
नींद आंखो में आती नहीं;
बस आप ख्वाबो में आयेंगे, यही सोच कर सो जाते हैं।
ना जाने इतनी मुहब्बत कहां से आई है उसके लिये;
कि मेरा दिल भी उसकी खातिर मुझसे रूठ जाता है।
ले गया छीन के कौन आज तेरा सब्रो-करार;
बेक़रारी तुझे ऐ दिल कभी ऐसी तो न थी।
मोहब्बत के बाद मोहब्बत मुमकिन तो है;
पर टूट कर चाहना सिर्फ एक बार होता है।
हज़ार चेहरों में उसकी मुशाहबतें मिले मुझ को;
पर दिल की ज़िद थी अगर वो नहीं तो उस जैसा भी नहीं।
तोड़ कर देख लिया आईना-ए-दिल तूने;
तेरी सूरत के सिवा और बता क्या निकला।
उससे कहो के मेरी सजा को कुछ कम कर दे;
मैं आदि मुजरिम नहीं हूँ गलती से इश्क हुआ था।
मेरे इन होंठों पर तेरा नाम अब भी है;
भले छीन ली तुमने मुस्कुराहट हमारी।
हमारे प्यार का यूँ इम्तिहान ना लो;
करके बेरुखी मेरी तुम जान ना लो;
एक इशारा कर दो हम खुद मर जाएंगे;
हमारी मौत का खुद पर इल्ज़ाम ना लो।
चाहने वाले की जानता है अजमत कोई-कोई;
दिल से करता है आज मोहब्बत कोई-कोई;
मोहब्बत में चाहते हैं सब अशूक यार;
दीवाने की माफिक चाहे तुरबत कोई-कोई।



